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अनुनासिक चंद्रबिंन्दु क्या होता है । What is anunasik chandrabindu ?


हेल्लो दोस्तों ,



             आज हम बात करने वाले है अपने new Topic के बारे में अपना new Topic बहुत ही interesting है । जिसे हम आसानी से समझ सकते है ।हम उसका प्रतिदिन उपयोग करते है पर हमें उसके बारे में ज्यादा नही पता होता है तो आज हम उसी Topic के बारे में बात करने वाले है । पिछले Topic में हमने अनुस्वार विंदु के बारे में जाना था ।अब हम अनुनासिक चंद्रबिंदु के बारे में जानेंगे । की यह क्या होता है ।

* अनुनासिक चंद्रबिंदु क्या होता है ?

अनुनासिक चंद्रबिंन्दु क्या होता है।
अनुनासिक चंद्रबिंन्दु


* इस अनुनासिक चंद्रबिंदु का प्रयोग (Use) कहा पर किया जाता है 
तो अब हम बात करते है अपने topic की 

अनुनासिक (चंद्रबिन्दु) की परिभाषा -

चंद्रबिन्दु (अनुनासिक) वे शब्द जिनका उच्चारण नाक और मुँह दोनों से होता है, उन्हे अनुनासिक कहते हैं।जिन स्वरों के उच्चारण में मुख के साथ-साथ नासिका की भी सहायता लेनी पड़ती है। अर्थात् जिन स्वरों का उच्चारण मुख और नासिका दोनों से किया जाता है वे अनुनासिक कहलाते हैं। जब किसी स्वर का उच्चारण नासिका और मुख दोनों से किया जाता है तब उसके ऊपर चंद्रबिंदु (ँ) लगा दिया जाता है। जैसे-हँसना, आँख,चाँद। इनका चिह्न चन्द्रबिन्दु (ँ) है।

अनुनासिक का प्रयोग -

जिस प्रकार अनुनासिक की परिभाषा में बताया गया है, कि जिन स्वरों का उच्चारण मुख और नासिका दोनों से किया जाता है, वे अनुनासिक कहलाते हैं और इन्हीं स्वरों को लिखते समय इनके ऊपर अनुनासिक के चिह्न चन्द्रबिन्दु (ँ) का प्रयोग किया जाता है।
यह ध्वनि (अनुनासिक) वास्तव में स्वरों का गुण होती है। अ, आ, उ, ऊ, तथा ऋ स्वर वाले शब्दों में अनुनासिक लगता है।

जैसे -
कुआँ, चाँद, अँधेरा आदि।
अनुस्वार(बिन्दु)और अनुनासिका (चंद्रबिन्दु) में अंतर
अनुनासिका स्वर है, जबकि अनुस्वार मूलत: व्यंजन। इनके प्रयोग के कारण कुछ शब्दों के अर्थ में अंतर आ जाता है।

जैसे –
हंस (एक जल पक्षी), हँस (हँसने की क्रिया)।
अंगना (सुंदर अंगों वाली स्त्री), अँगना (घर के बाहर खुला बरामदा)
अनुनासिका (चंद्रबिंदु) को परिवर्तित नहीं किया जा सकता, जबकि अनुस्वार को वर्ण में बदला जा सकता है।
अनुनासिका का प्रयोग केवल उन शब्दों में ही किया जा सकता है, जिनकी मात्राएँ शिरोरेखा से ऊपर न लगी हों।

जैसे- अ, आ, उ, ऊ, ऋ

उदाहरण के रूप में - हँस, चाँद, पूँछ
शिरोरेखा से ऊपर लगी मात्राओं वाले शब्दों में अनुनासिका के स्थान पर अनुस्वार अर्थात बिंदु का प्रयोग ही होता है। जैसे - गोंद, कोंपल, जबकि अनुस्वार हर तरह की मात्राओं वाले शब्दों पर लगाया जा सकता है।




I Hope आप सभी को हिंदी वर्णमाला की इस अनुनासिक चंद्रबिंदु के बारे में अच्छी जानकारी प्राप्त हुई होगी और आप इसे आसानी से समझ पाए होंगे । आपको कुछ doubt हो तो Comment करके पूछ सकते 
हो ।


       धन्यवाद 👍

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